Mukhaute – मुखौटे

मुखौटे ..

हर  तरफ , हर  जगह , सुन्दर , कुरूप  ..हर  तरह  के  मुखौटे 

हर  मुखौटा  एक  से  बढ़कर  एक 

और  मुखौटों  की  आँखों  पे  रंगीन  चश्मे 

चश्मे  भी  ऐसे  के  सामने  खड़े  मुखौटों  को  और  खूबसूरत  कर  जाएं 

तब  क्यों  न  नज़रें  हर  तरफ  दौड़  जाएं 

 

एक  से  मुखौटों  के  सुन्दर  काफिले भी  बन  जाएं 

पर  जब  कभी  काफिलों  में  किसी  से  नज़रें ..या  कहें  चश्मे  जो  मिल  जाएं 

और  झाँक  जाएं  हम  उस  चश्मे  में 

तो  अक्सर  एक  डर  सा  कौंध  जाए 

और  याद  आजे  के  सच  में  तो  हैं  ये  मुखौटे  ही 

जिसने  जैसा  दिखाना  चाह  वैसा  पहन  लिया 

पर  डर  और  गहरा  जाए  ..

जब  ख्याल  आए  के  मुखौटा  कहीं  हट  न  जाए 

कहीं  प्रेम  से  भरा  ये  मुखौटा ..भीतर  से  कुछ  और  न  दिख  जाए 

तब  तो  सब  अपने  अपने  मुखौटों  को  कस  के  पकडे  जाएं 

मुखौटे  कहीं  खुल  न  जाएं 

 

संभावनाएं  तो  कई  हैं ..

शायद  किसी  चश्मे  के  पीछे  किन्हीं  आँखों  में  प्रेम  भी  मिल  जाए ..

काश  हम  डर  छोड़  पाएं ..मुखौटे  उतरें  और  आँखों  में  झांक  जाएं 

पर  एक  तरफ  जाने  पहचाने  मुखौटों  में  जीने  की  सुविधा ..

और  एक  तरफ  अनजान  असली  चेहरों  में  मैत्री  पहचानने  की  दुविधा ..

जिनसे  छलकते  असली  प्रेम , असली  ईर्ष्या , असली  करुना  या  असली  क्रोध ..

कुछ  पक्का  नहीं .. अज्ञात ..अनजान 

जाने  पहचाने  मुखौटे  ..या  अनजान  चेहरे 

सोचें  तो  एक  जोखिम  है .. और  सोचें  तो  एक  बोध 

और  न  सोचें  ..तो  चलो  हरे  चश्में  लगाएं ..और  घांस  हमेशा  ही  हरी  पाएं  !

पर  हाँ .. फिर  भूख  और  स्वस्थ्य  को  भूल  एक  स्वस्थ  दिखता  मुखौटा  ज़रूर  ढूंढ  लाएं  ..

 

Image

 

Mukhaute..

Har taraf, har jagah, sundar, kuroop ..har tarah ke mukhaute

Har mukhauta ek se badhkar ek

Aur mukhauton ki aankhon pe rangeen chashme

Chashme bhi aise ke saamne khade mukhauton ko aur khoobsoorat kar jaaein

Tab kyon na nazarein har taraf daud jaaein

 

Ek se mukhauton ke sundar kaafile bhi ban jaaein

Par jab kabhi kafilon mein kisi se nazarein..ya kahein chashme jo mil jaaein

Aur jhaank jaaein hum us chashme mein

To aksar ek darr sa kaundh jaae

Aur yaad aajae ke sach mein to haen ye mukhaute hee

Jisne jaisa dikhana chaha waisa pehen liya

Par darr aur gehra jaae ..

Jab khayal aae ke mukhauta kaheen hat na jaae

Kahin prem se bhara ye mukhauta..bheetar se kuchh aur na dikh jaae

Tab to sab apne apne mukhauton ko kas ke pakde jaaein

Mukhaute kaheen khul na jaaein

 

Sambhaavnaaein to kai haen..

Shayad kisi chashme ke peechhe kinheen aankhon mein prem bhi mil jaae..

Kaash hum darr chhod paaein..mukhaute utarein aur ankhon mein jhank jaaein

Par ek taraf jaane pehchane mukhauton mein jeene ki suvidha..

Aur ek taraf anjaan asli chehron mein maitrei pehchaanne ki duvidha..

Jinse chhalakte asli prem, asli eershya, asli karuna ya asli krodh..

Kuchh pakka nahi.. agyaat..anjaan

 

Jaane pehchane mukhaute ..ya anjaan chehre

Sochein to ek jokhim hai.. Aur sochein to ek bodh

Aur na sochein ..to chalo hare chashmein lagaaein..aur ghaans humesha hee hari paaein !

Par haan.. fir bhookh aur swasthya ko bhool ek swasth dikhta mukhauta zarur dhoondh laaein ..

Published by

adityapathak

Please visit me at my homepage https://adityapathak.net/ for more info. Thanks and best wishes, Aditya

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